06/06/2026
धनबाद : जिले में अवैध लॉटरी के बढ़ते कारोबार को लेकर अब जनप्रतिनिधियों के पास भी शिकायतें पहुंचने लगी हैं। सिंदरी विधायक को सौंपे गए एक आवेदन में दावा किया गया है कि जिले के लगभग सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में फर्जी लॉटरी का संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जिसके जरिए प्रतिदिन 8 से 10 करोड़ रुपये तक का कारोबार किया जा रहा है। आवेदन में इस अवैध धंधे को तत्काल बंद कराने की मांग की गई है।आवेदन में आरोप लगाया गया है कि झारखंड में लॉटरी प्रतिबंधित होने के बावजूद निरसा, गोविंदपुर, बलियापुर, सिंदरी, झरिया, कतरास, भौरा, पाथरडीह, जामाडोबा समेत कई इलाकों में खुलेआम जाली लॉटरी बेची जा रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह लॉटरी पश्चिम बंगाल सरकारी लॉटरी की तर्ज पर तैयार की जाती है, लेकिन उसका उससे कोई संबंध नहीं है। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और गरीब व मध्यमवर्गीय लोग आर्थिक शोषण का शिकार बन रहे हैं।आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि पूरे नेटवर्क का संचालन कुछ चुनिंदा लोगों द्वारा किया जा रहा है। साथ ही आरोप लगाया गया है कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में काउंटर लगाकर प्रशासन की नजर के सामने यह कारोबार चल रहा है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मैथन और निरसा क्षेत्र में कथित रूप से जाली लॉटरी की छपाई और वितरण का कार्य होता है।इधर, जब इस मामले में धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार से सवाल किया गया तो उन्होंने मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही और साक्ष्य उपलब्ध कराने की अपील की। इसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि यदि आवेदन में किए गए दावे सही हैं तो अब तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो ने कहा कि अवैध लॉटरी का मुद्दा पहले भी विधानसभा में उठाया गया था। सरकार ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर यह धंधा अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब और भोले-भाले लोग लालच में आकर ठगी का शिकार हो रहे हैं। विधायक ने मांग की कि सरकार इस पर स्पष्ट नीति बनाए और जब तक कोई निर्णय नहीं होता, तब तक अवैध लॉटरी के कारोबार पर सख्ती से रोक लगाई जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को वह पुनः विधानसभा में प्रमुखता से उठाएंगे।अब सवाल यह है कि आवेदन में लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच कब होगी और अवैध लॉटरी के कथित नेटवर्क पर प्रशासन कब कार्रवाई करेगा। फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की निगाहें प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।